Saturday, 4 February 2017

0-590 आपके मेरे दरम्यान कभी

आपके मेरे दरम्यान कभी कोई फासला न था,
मिले जब भी, साथ में शख्स कोई दूसरा न था,
फ़ासले हो गए, हमसफ़र भी मिल गए आपको,
इतनी जल्दी यह होगा, ग़ुमाँ कोई इसका न था..(वीरेंद्र)/0-590


रचना: वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"

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