Wednesday, 1 February 2017

0-589 कभी ख़ुशी में भी आँख

कभी ख़ुशी में भी आँख से आंसू आ जाते हैं,
कभीकभी किसी दर्द में भी हम मुस्कुराते हैं.
मुस्कराहट भी, आंसू भी हमी में हैं पोशीदा,
पर इन्हें अक्सर कुछ लोग भी हमें दे जाते हैं..(वीरेंद्र)/0-589


रचना: वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"

No comments:

Post a Comment