Tuesday, 24 January 2017

2-491 कोई खुली जुबांन से,

कोई खुली जुबान से, कोई दबी ज़ुबान से,
कोई देशद्रोही हिंद से, कोई पाकिस्तान से,
कर रहा दहशतगर्दों की पुरज़ोर हिमायत,
बाहर आजा हिंद की तलवारअब म्यान से..(वीरेंद्र)/2-491


रचना: वीरेंद्र सींह "अजनबी"

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