Saturday, 28 January 2017

2-487 मै धर्मविहीन हो जाऊंगा,

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मैं धर्मविहीन हो जाऊंगा, गर तुम भी अपना धर्म छोड़ दो।
वर्ना तो आज से मुझको 'सांप्रदायिक' कहना तुम छोड़ दो।.(वीरेंद्र)/2-487


रचना: वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"

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