Thursday, 5 January 2017

2-482 जिंदगी हर साल होती जा

ज़िन्दगी हर साल होती जा रही है छोटी, और यादें बड़ी,
कहानी के लिए हर पल जुड़ती जा रही है, कड़ी पे कड़ी..(वीरेंद्र)/2-482


रचना: वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"

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