Sunday, 15 January 2017

2-479 गली गली लिए

गली गली लिए हुए हैं लोग पत्थर हाथ में,
रहनुमा खड़े हैं बद-अमली की फ़िराक में,
ख्वाब चकनाचूर हो गए जो देखे थे कभी,
मक़सदे-आज़ादी हम मिला रहे हैं ख़ाक़ में..(वीरेंद्र)/2-479


रचना: वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"

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