Sunday, 15 January 2017

2-478 भ्रष्टाचार कहाँ नहीं,

भ्रष्टाचार कहाँ नहीं,
यह कोई नया नहीं, 
हम ही तो करते हैं,
बोलो हम कहाँ नहीं..(वीरेंद्र)/2-478


रचना: वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"

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