Thursday, 5 January 2017

2-477 हमने बनाए थे चार 'अपने"

हमने बनाए थे चार 'अपने',
दो हमें न भाए, दो को हम रास नहीं आए।
किसको फली हैं नज़दीकियां,
ज़िंदगी के आड़े वक्त में काम, गैर ही आए..(वीरेंद्र)/2-477


रचना: वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"

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