Tuesday, 24 January 2017

1-870 बेइंतहा इंतज़ार किया,

बेइंतिहा इंतज़ार किया, मगर बेकार किया,
तुझे तो आना न था, खुद ही को बेज़ार किया..(वीरेंद्र)/1-870


रचना: वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"

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