Tuesday, 17 January 2017

1-867 शायरी पर मेरी,

शायरी पर मेरी, आए हर्फ़ बहुत हैं,
के इसमें खुशियां कम और दर्द बहुत हैं..(वीरेंद्र)/1-867


रचना: वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"

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