Thursday, 5 January 2017

1-864 वश में होता गर

वश में होता गर वक्त पर मसलों को सुलझा लेना,
इस कदर ये ज़िन्दगियाँ उलझी सी न हुआ करतीं..(वीरेंद्र)/1-864


रचना:; वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"

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