Thursday, 5 January 2017

1-862 इश्क के बीमार कहाँ

इश्क़ के बीमार कहाँ मरा करते हैं,
हमें देखो अभी तक जिए जा रहे हैं..(वीरेंद्र)/1-862

रचना: वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"

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