Sunday, 15 January 2017

0-585 मै कुछ अलैहदा

मैं कुछ अलैहदा हूँ इस ज़माने से,
पसीजता नहीं किसी के मनाने से,
मैं आइना हूँ, ढुलमुल इंसाँ नहीं,
बाज़ न आऊंगा सच्चाई बताने से..(वीरेंद्र)/0-585


रचना: वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"

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