Friday, 6 January 2017

0-584 बक्श दीं तूने

बख्श दीं तूने अपनी तमाम क़ूबतें, इंसा को,
बस रूह का फैसला अपने पास रख लिया।
देदी छूट इंसान को, कुदरत में भी दख्ल की,
पर इंतज़ामे-कायनात अपने पास रख लिया।.(वीरेंद्र)/०-584


© रचना: वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"

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