Thursday, 8 December 2016

0-578 कितनी ग़लतफ़हमी में

कितनी ग़लतफ़हमी में रहते थे हम,
इश्क में आपके पागल रहते थे हम,
सुकूँ हो गया आपके बेवफा होने से,
वर्ना तो ज़िंदगी से परेशां रहते थे हम..(वीरेंद्र)/०-578

रचना: वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"

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