Wednesday, 14 December 2016

1-840 आजकल नाकाबिले-बर्दाश्त

आजकल नाकाबिले-बर्दाश्त हो गए हैं  रिश्ते,
अब सिर्फ दीवारों पर टंगे अच्छे लगते हैं रिश्ते..(वीरेंद्र)/1-840

रचना:©वीरेंद्र सिन्हा  "अजनबी"

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