Thursday, 8 December 2016

2-473 काश, भावनाओं का भी कोई

काश, भावनाओं का भी कोई ऑन-ऑफ़ स्विच हुआ करता,
जब जितनी देर चाहता इंसान, ऑन-ऑफ़ कर लिया करता,
क्यों होता कोई अपने दिल के हाथों मायूस-ओ-मजबूर इतना,
भूलना होता किसी को तो, बस एक बटन दबा दिया करता..(वीरेंद्र)/2-473

रचना: वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"

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