Monday, 12 December 2016

2-464 किस कदर कमीने

किस कदर कमीने हो गए हैं लोग,
आँखें होके भी नाबीने हो गए हैं लोग..(वीरेंद्र)/२-464

रचना: वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"

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