Wednesday, 14 December 2016

1-839 मेरे ग़मों से भी खुशियों का

मेरे ग़मों से भी, खुशियों का मुग़ालता वो खा जाते हैं,
के अक्सर ख़ुशी में भी, मेरी आँख में आंसू आ जाते है..(वीरेंद्र)/1-839

रचना: © वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"

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