Sunday, 25 December 2016

2-468 ज़मीं पर मिलें चार

ज़मीं पर मिलें चार, आसमाँ में बहत्तर,
चलो मर जाऐं, अट्ठारह गुना पाना है बेहतर..(वीरेंद्र)/2-468

रचना:वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"

No comments:

Post a Comment