Friday, 30 December 2016

1-861 कभी तो अपने बारे में भी

कभी तो अपने बारे में भी सोच, ऐ ज़िन्दगी,
या हमेशा यूँही दबी-भिंची गुज़रती जाएगी..(वीरेंद्र)/1-861

रचना: © वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"

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