Sunday, 25 December 2016

1-857 पहले तो लुटा दीं

पहले तो लुटा दीं तमाम मुहब्बतें मैंने,
अब थोड़ी सी के लिए मै खुद तरस रहा हूँ..(वीरेंद्र)/1-857

रचना: वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"

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