Sunday, 25 December 2016

1-856 क्या कहने आपके

क्या कहने आपके जो आप बहुआयामी लिखते हैं,
हमतो सिर्फ अपने रंजोगम और नाकामी लिखते है..(वीरेंद्र)/1-856

रचना: वीरेंद्र सिन्हा  "अजनबी"

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