Sunday, 25 December 2016

1-853 मेरे महबूब

मेरे महबूब मुझे भी ये हुनर अपना सिखा दे,
रिश्ते कैसे तोड़े जाते हैं, मुझे इतना सिखा दे..(वीरेंद्र)/1-853

रचना: वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"

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