Saturday, 17 December 2016

1-850 सूना रहा है कोई यूं

सुना रहा है कोई यूं अपनी उदासी का रोना,
यकीं हो गया मुझे, पत्थर भी उदास होते हैं..(वीरेंद्र)/1-850


रचना: वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"

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