Sunday, 25 December 2016

0-581 बदल जाना तो है

बदल जाना तो है कुदरत का सिलसिला,
मौसम ही क्या, हालात भी बदल जाते हैं।
थोड़ा बहुत तो दुनियां ही बदल जाती है,
पर कुछ लोग तो ज़्यादा ही बदल जाते हैं..(वीरेंद्र)/0-581

रचना: वीरेंद्र सिन्हा © "अजनबी"

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