Wednesday, 30 November 2016

1-837 फनाह कर दे,

फनाह कर दे,मेरा वजूद मिटा दे,मगर 
मैं कबतक उफ़्फ़ न करुँ ये तो बता दे..(वीरेंद्र)/1-837

रचना: वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"

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