Thursday, 10 November 2016

2-459 देशद्रोही तेरी जुबां

देशद्रोही तेरी ज़ुबान काफी है पर्यावरण ख़राब करने के लिए,
तेरा नाम ही पर्याप्त है देश का मौहाल बर्बाद करने के लिए,
तू इस कदर आतंक फैला देता है राजनीती के गलियारों में,
देशभक्तों को बरसों बरसों लग जाते हैं इसे साफ़ करने के लिए..(वीरेंद्र)/2-459


रचना: वीरेंद्र सिन्हा ."अजनबी"

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