Wednesday, 30 November 2016

2-480 मै कहाँ कहाँ बचूंगा

मैं कहाँ कहाँ बचूंगा,
कभी मारेगा ज़मीर,
कभी मारेंगे जज़्बात,
कभी मारेंगे एहसासात,
कभी मारेगी मुहब्बत,
कभी फनाह करेगी नफरत,
हर रोज़ कोई न कोई मौत,
मैं भला कितनी बार मरूंगा..(वीरेंद्र)/2-480


रचना:वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"

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