Wednesday, 30 November 2016

1-848 मत पोंछो धुंध आईने से,

मत पोंछो धुंध आईने से, पड़ी रहने दो,
कुछ देर और सही, सच्चाई छुपी रहने दो..(वीरेंद्र)/1-848

रचना:वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"

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