Sunday, 20 November 2016

1-831 हर रोज़ बिला नागा

हर रोज़ बिला नागा चली आती हैं तेरी यादें,
तन्हाई में मेरी ख़लल डाल जाती है तेरी यादें..(वीरेंद्र)/1-831

रचना: वीरेंद्र सिन्हा ."अजनबी"

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