Sunday, 20 November 2016

1-832 न समझा कर खुद को

न समझा कर खुद को खुदा
दुनियां में नाखुदा भी होते हैं..(वीरेंद्र)/1-832

रचना: वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"

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