Sunday, 13 November 2016

1-830 ख़ामोशी को अपनी मेरी

ख़ामोशी को अपनी, मेरी सज़ा न समझ,
नफरतों को अपनी, मेरी क़ज़ा न समझ..(वीरेंद्र)/1-830

रचना: वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"

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