Sunday, 20 November 2016

1-835 अपने भी नहीं अपने

अपने भी नहीं अपने, गैर क्या होंगे अपने,
हक़ीक़तें भी नहीं अपनी, सपने तो हैं सपने..(वीरेंद्र)/1-835

रचना: वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"

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