Wednesday, 30 November 2016

2-467 हर घडी तुझसे दूर

हर घडी तुझसे दूर करती जा रही है अब मुझे, 
हर सांस लेती जा रही है क़ज़ा की तरफ मुझे..(वीरेंद्र)/2-467

रचना: वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"

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