Wednesday, 30 November 2016

1-1000 कभी जला लिए कभी

कभी जला लिए, कभी बुझा दिए चराग़ तेरी यादों के,
बस इसी तराह तमाम उम्र तन्हा बसर कर ली हमने..(वीरेंद्र)/1-1000

रचना: वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"

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