Sunday, 20 November 2016

1-833 दुनियां गोल है यार,

दुनियां गोल है यार, इतना भी भाव मत खा,
कौन जाने घूमफिर के तू मुझे कहाँ मिल जा..(वीरेंद्र)/1-833

रचना: वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"

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