Wednesday, 30 November 2016

1-847 मुतवातिर क़त्ल करता गया

मुतवातिर क़त्ल करता गया, वो मेरे अरमानों का,
छुपाके तलवार उसकी, बेगुनाह हम उसे साबित करते गए..(वीरेंद्र)/1-847

रचना: वीरेंद्र सिन्हा  "अजनबी"

No comments:

Post a Comment