Sunday, 13 November 2016

1-828 इसी तरह रंज-ओ-गम

इसी तराह रंज-ओ-गम देते रहा करो तुम मुझे,
वजूद का मेरे यकीन दिला दिया करो तुम मुझे..(वीरेंद्र)/1-828

रचना: वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"

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