Thursday, 10 November 2016

1-827 निगोड़ी तकदीर भी कैसी है

निगोड़ी तक़दीर कैसी है, कहीं चैन से सांस नहीं लेने देती,
कहीं है दूषित हवा, तो कहीं ज़िन्दगी सांस नहीं लेने देती..(वीरेंद्र)/1-827

रचना: वीरेंद्र सिन्हा ."अजनबी"

No comments:

Post a Comment