Friday, 4 November 2016

1-825 जुबां सिल लेते हैं,

ज़ुबाँ सिल लेते हैं, दिल दबा लेते हैं,किनारा करने वाले,
जाने कब हाथ थाम लेते हैं रकीब का ये भूल जाने वाले..(वीरेंद्र)/1-825

रचना: वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"

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