Friday, 4 November 2016

1-824 न ज़मीं की कमी है

न ज़मीं की कमी है ना आसमाँ की कमी है,
ज़िंदगी में आज से बस एक माँ की कमी है..(वीरेंद्र)/1-824

रचना: वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"

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