Thursday, 24 November 2016

1-822 काश एक दिन ऐसा भी

काश एक दिन ऐसा भी गुज़र जाए,
तुझको न देखूं और ग़ज़ल बन जाए..(वीरेंद्र)/1-822

रचना: वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"

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