Friday, 4 November 2016

1-821 दुनियां जहांन ने पढ़

दुनियां जहाँन ने पढ़ लिए शेर, जो लिखे थे मैंने,
बस उसी ने ना पढ़े जिसके लिए वो लिखे थे मैंने..(वीरेंद्र)/1-821

रचना: वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"

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