Friday, 4 November 2016

1-820 खामोश ही रह "अजनबी"

खामोश ही रह 'अजनबी', इज़हार न कर ख्यालात का
जाने कौन क्या मतलब निकाल ले तेरी किसी बात का..(वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"

रचना: वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"

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