Wednesday, 30 November 2016

0-579 नजदीकियां न बना पाएंगी

नज़दीकियां न बना पाएंगी रिश्ते,
ना ही दूरियां तोड़ पाएंगी रिश्ते,
दिलों से निकलती हैं जो आवाज़ें,
वही बना या बिगाड़ पाएंगी रिश्ते..(वीरेंद्र)/0-579 

रचना: ©  वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"

No comments:

Post a Comment