Sunday, 13 November 2016

1-836 तोते की जुबां बोलोगे

तोते की ज़ुबाँ बोलोगे तो पिंजरे में कैद रहोगे
कोयल की मीठी बोली बोलो, आज़ाद रहोगे..(वीरेंद्र)/1-836

रचना: वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"

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