Thursday, 10 November 2016

0-576 जहाँ चाह है, वहां

जहाँ चाह है, वहां राह है,
बहाने बनाना बेवजाह है,
भूलना है तो भूल जाओ,
यहाँ भी किसे परवाह है..(वीरेंद्र)/0-576

रचना: वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"

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