Sunday, 30 October 2016

2-461 सारे नेतागण चौकस और


सारे नेतागण चौकस और सयाने हो गए,
मगर मूर्ख मतदाता बस सठिया गया है।

वोट बैंक-वालों के मसाइल तो हल होगये,
असंगठित वोटर को दफना दिया गया है।


सबने छीन लिया खम्बा पटरी उखाड़ के, 
शेष जनरल वर्ग को लटका दिया गया है..(वीरेंद्र)/2-461


रचना: वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"

No comments:

Post a Comment