Sunday, 30 October 2016

2-460 मनमोहक रूप देखने

मनमोहक रूप देखने की लालसा में,
निहारक बहुत उत्सुक हो जाता है।
किन्तु सत्यवादी निर्दयी दर्पण है कि,
बड़ा निर्लज्ज मुंहफट हो जाता है।
बोल देता है सही उम्र बिन लाग लपेट,
कृत्रिम बनाव श्रृंगार प्रकट हो जाता है।.(वीरेंद्र)/2-460


रचना: वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"

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